इंजन दौड़

सर्वप्रथम समावस्था में खड़े हो जाए। अंगूठा अंदर मोड़ कर मुठ्ठी बंद कर ले। दोनों हाथों को कमर से सटाकर रखे । कोहनी से हाथ मोड़कर जमीन की समांतर सामने की ओर फैलाए। करतल भाग एक दूसरे के सामने रखे। स्वास को खींचकर बाएं पैर को घुटने तक 90 डिग्री के कोण पर ऊपर उठाए । दाहिने हाथ को सामने आगे की ओर सीधा रखें। स्वास को छोड़कर दाहिने हाथ और बाएं पैर को पूर्व स्थिति में लाए । सांस को छोड़ें तुरंत खींच कर दाहिना पैर घुटने तक 90 डिग्री के कोण तक उठाए , बाएं हाथ को सामने फेके। स्वास को छोड़कर दाएं और बाएं हाथ पूर्व स्थिति में लाएं। क्रिया को इसी प्रकार 9 -10 बार करने के पश्चात स्वास परस्वास के साथ जल्दी-जल्दी अपने स्थान पर दौड़े, तथा थकान हो जाने पर क्रिया को समाप्त करें।

लाभ

हाथ व पैरों का दर्द मीठा होता है। शरीर की स्थूलता कम होती है। सीना, जंघा और पिंडलियां पुष्ट बनकर, उनका दर्द मिटाता है। दौड़ लगाने वाले साधकों के लिए अत्यधिक लाभकारी है। शरीर फुर्तीला और शक्तिशाली बना कर साधक अधिक समय तक काम करने की क्षमता प्राप्त करता है।

7 thoughts on “इंजन दौड़

  1. Проблема не в проблеме, проблема в отношении к проблеме, спасибо за это, но я не понял, но я перевел, и это очень хороший урок для меня, спасибо

    1. The problem is not the problem, the problem is in relation to the problem, thanks for that, but I didn’t understand, but I translated and this is a very good lesson for me, thanks

  2. Yoga is all about the true connection to the self, sometimes strength comes up because that is what is needed, but other times compassion or patience is needed. I truly believe a consistent yoga practice will strengthen the elements of the self that are needed to navigate the paths that we walk.”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *